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- प्रभू जी देदो ऐसा ज्ञान ,
- करूँ में सेवा तुम्हारी ,
- और हो जाए कल्याण ,
- प्रभू जी ........
- तीसरा नेत्र खुल जाए ,
- और हो जाए तुम्हारा दीदार ,
- अज्ञान-रूपी अँधेरा भाग जाए ,
- और अन्दर हो जाए प्रकाश ,
- काम क्रोध लोभ मोह भाग जाएँ ,
- हे प्रार्थना यह मदन गोपाल की ,
- प्रभू जी देदो ऐसा ज्ञान !


- बिजली कैसे कड़कती है ,
- क्या तुम बतलाओगे ,
- यह है प्रभू की कारीगरी ,
- तुन क्या समझाओगे ,
- कड़क के साथ होती है ऐसी रोशनी ,
- की जैसे पूनम के चाँद की हो चांदनी ,
- कड़क के साथ जब गिरती है बिजली ,
- मचा देती है सब के दिलों में खलबली ,
- मदन गोपाल की है यह विनती ,
- प्रभू सब पर कृपा करना ,
- और न गिराना किसी के ऊपर बिजली !


- प्रभु कहाँ छुपा रखे हैं तुम ने घडे ,
- जिन में भरा रहता है पानी ,
- जब जी चाहता है उलटा कर देते हो ,
- गिरता है बूंद बूंद पानी ,
- यह पता नहीं चलता की ये ,
- तुम्हारा गुस्सा है या है महरबानी,
- मदन गोपाल की है यह विनती ,
- सदा महरबानी ही रखना ,
- न करना गुस्सा कभी !
