में मन मंदिर में झाडू लगाउंगा !
विचारों को वहीं से भागाउंगा !!
अपने प्रभु के लिए रास्ता बानाउंगा !
प्रभु आयंगे बैठेंगे !!
मन रुपी अगर बत्ती जलाउगा !
श्रद्धा के फूल चढाउंगा !!
बुद्धी का दीप जलाउंगा !
प्रभु के पैर पकड कर !!
अपने आंसू रुपी गंगा जल से निहलाउंगा !
कहे मदन गोपाल आखों के पलक रुपी,
अंगोछे से पोंछ कर चन्दन लगाउंगा !!
२५-०३-०४
Friday, February 1, 2008
Sunday, January 20, 2008
जन्म दिन
आज मेरा जन्म दिन है ,
किताबे साल का हो गया ,
पूरा हिसाब है रखा ,
मगर यह पता नहीं कि ,
जिन्दगी का कितना हिस्सा हुआ खतम ,
कल का पता नहीं ,
कल का क्या छण का भी पता नहीं ,
बिता दी जिन्दगी यों ही ,
याद प्रभु की आई न कभी ,
समय बिता दिया खाने पीने में ,
मोज मस्ती में ,
जुआखाने में शराब खाने में ,
कहे मदन गोपाल अब तो कर ले प्रभु का ध्यान ,
तेरा उद्धार हो जायगा तू भवसागर पार हो जायगा !
किताबे साल का हो गया ,
पूरा हिसाब है रखा ,
मगर यह पता नहीं कि ,
जिन्दगी का कितना हिस्सा हुआ खतम ,
कल का पता नहीं ,
कल का क्या छण का भी पता नहीं ,
बिता दी जिन्दगी यों ही ,
याद प्रभु की आई न कभी ,
समय बिता दिया खाने पीने में ,
मोज मस्ती में ,
जुआखाने में शराब खाने में ,
कहे मदन गोपाल अब तो कर ले प्रभु का ध्यान ,
तेरा उद्धार हो जायगा तू भवसागर पार हो जायगा !
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