मन ने सब को बाँध रखा है ,
मन को बांधना आसान नहीं ,
मन ने देवताओं को परास्त कर डाला ,
वह इन्द्रियों को क्या समझता है ,
मन की मार बड़ी जबरदस्त है ,
मन के सामने कौन ठहर सकता है ,
मन ही मन का बोधक है ,
मन ही मन का साधक है ,
मन ही मन का बाधक है ,
और मन ही मन का घातक है !
मन सरपट भागने वाला घोडा है ,
मन को वैराग्य की लगाम से
उसकी चाल काबू में करके ,
उसे वश में करना होगा ,
jo ऐसे दुर्जन मन पर सवार होगा ,
वह बलवानो से भी बलवान होगा ,
मन की एक बात बड़ी अच्छी है ,
जिस चीज का चसका लगता है ,
उसी में वह लग जाता है ,
इस लिए इसे ,
आत्मनुभाव का ,
सूख बराबर देते रहना चाहिए !
Saturday, April 26, 2008
Sunday, April 6, 2008
प्रभु जी तुम बिन कोन
प्रभु जी तुम बिन कोन हमार ,
तूं ही हम सब की पालनहार
प्रभु जी तुम ..........!
प्रभु जी किस पर जाकर लगाऊं
में गुहार ,
दान पुन्य कुच्छ किय नहीं ,
पापों का लगाया अम्बार ,
प्रभु जी तुम .........!
अखियाँ दरसन को तरस गई ,
आयेगी कब हमारी बार ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
भाव सागर से पार लगा दो ,
हमारी नय्या के खेवन हार ,
प्रभु जी तुम बिन ......!
प्रार्थना हे मदन गोपाल की ,
पापों को हमारे ध्यान न रखना ,
सिर चरणों में रख लेने देना ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
२१-२-08
तूं ही हम सब की पालनहार
प्रभु जी तुम ..........!
प्रभु जी किस पर जाकर लगाऊं
में गुहार ,
दान पुन्य कुच्छ किय नहीं ,
पापों का लगाया अम्बार ,
प्रभु जी तुम .........!
अखियाँ दरसन को तरस गई ,
आयेगी कब हमारी बार ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
भाव सागर से पार लगा दो ,
हमारी नय्या के खेवन हार ,
प्रभु जी तुम बिन ......!
प्रार्थना हे मदन गोपाल की ,
पापों को हमारे ध्यान न रखना ,
सिर चरणों में रख लेने देना ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
२१-२-08
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प्रभु जी तुम बिन कोन
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Saturday, April 5, 2008
तुम्हारी पूजा करूँ
तुम्हारी पूजा करूँ प्रभूजी में फूलों से फूलों से ,
मन के फूलों से ,
मन की मणियाँ अर्पित कर दूँ
तुम्हारे चरणों में !फूल न सही
मन की मणियाँ पुरो दूँ ,
हारों में हारों में !
हर मणी हे मन की मेरे तन की ,
त्य्म्हारी सेवा में तुम्हारी सेवा में !
मन का फूल बने और हार बने तन का ,
जिनको अरपर्ण कर सुफल करूँ ,
में लक्ष अपने जीवन का १
ग्रहण करो प्रभु जी मेरी माला ,
शरण तुम्हारी में आया !
यह प्ररार्थाना हे मदन गोपाल की ,
जीवन सुफल करदो ,
दे कर अपने हाथों की छाया
१८-३-२००६
मन के फूलों से ,
मन की मणियाँ अर्पित कर दूँ
तुम्हारे चरणों में !फूल न सही
मन की मणियाँ पुरो दूँ ,
हारों में हारों में !
हर मणी हे मन की मेरे तन की ,
त्य्म्हारी सेवा में तुम्हारी सेवा में !
मन का फूल बने और हार बने तन का ,
जिनको अरपर्ण कर सुफल करूँ ,
में लक्ष अपने जीवन का १
ग्रहण करो प्रभु जी मेरी माला ,
शरण तुम्हारी में आया !
यह प्ररार्थाना हे मदन गोपाल की ,
जीवन सुफल करदो ,
दे कर अपने हाथों की छाया
१८-३-२००६
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गूरुवर मोको
गूरुवर मोको अपनी शरण में लीजो ,
मेरे अवगुण क्षमा कर दीजो ,
गूरुवर मोको .............!
में बालक नादान अज्ञानी ,
न जानूँ पूजा पाठ की विधि ,
मेरी पूजा कबूल कर लीजो ,
गूरुवर मोको .............!
जो में आऊं द्वार तिहारे ,
मोको गले से लगालीजो ,
मेरे खोट सदा के लिय मिटा दीजो ,
गूरुवर मोको .............!
मुझे अपना सेवादार बना लीजो ,
में तुम्हारे चरणों का दास ,
मुझे वहीं रहने की आज्ञा दीजो,
गूरुवर मोको ..........
प्रार्थना हे यह मदन गोपाल की ,
मुझे अपने से कभी अलग मत कीजो ,
गूरुवर मोको ............!
२५-२-०६
मेरे अवगुण क्षमा कर दीजो ,
गूरुवर मोको .............!
में बालक नादान अज्ञानी ,
न जानूँ पूजा पाठ की विधि ,
मेरी पूजा कबूल कर लीजो ,
गूरुवर मोको .............!
जो में आऊं द्वार तिहारे ,
मोको गले से लगालीजो ,
मेरे खोट सदा के लिय मिटा दीजो ,
गूरुवर मोको .............!
मुझे अपना सेवादार बना लीजो ,
में तुम्हारे चरणों का दास ,
मुझे वहीं रहने की आज्ञा दीजो,
गूरुवर मोको ..........
प्रार्थना हे यह मदन गोपाल की ,
मुझे अपने से कभी अलग मत कीजो ,
गूरुवर मोको ............!
२५-२-०६
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Tuesday, April 1, 2008
शिव शिव बोल
शिव शिव बोल ,
यह बोल बड़े अनमोल !
बिना तोले ही बोल ,
तोलने में समय मत गवां ,
समय गवायेगा तो फिर पीछे पछ्ताय्गा !
समय बीता फिर वापिस नहीं आयगा !
शिव शिव बोल तेरा मन साफ हो जायगा ,
दिल से परदा हटा तो तेरा ह्रदय शुद्ध हो जायगा !
दिल शिव के लायक बन जायगा ,
शिव आयंगे तेरे दिल में निवास करेंगे ,
तेरे पाप का घडा फूट जायगा !
पाप पुंय में बदल जायेगे ,
शिव त्य्झे देंगे भक्ती और ,
सुबुद्धी दान !
कहे मदन गोपाल शिव की
माया हे अपरम्पार ,
कूइ नही पाया उसका पार
२१-१२-06
यह बोल बड़े अनमोल !
बिना तोले ही बोल ,
तोलने में समय मत गवां ,
समय गवायेगा तो फिर पीछे पछ्ताय्गा !
समय बीता फिर वापिस नहीं आयगा !
शिव शिव बोल तेरा मन साफ हो जायगा ,
दिल से परदा हटा तो तेरा ह्रदय शुद्ध हो जायगा !
दिल शिव के लायक बन जायगा ,
शिव आयंगे तेरे दिल में निवास करेंगे ,
तेरे पाप का घडा फूट जायगा !
पाप पुंय में बदल जायेगे ,
शिव त्य्झे देंगे भक्ती और ,
सुबुद्धी दान !
कहे मदन गोपाल शिव की
माया हे अपरम्पार ,
कूइ नही पाया उसका पार
२१-१२-06
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Monday, March 31, 2008
रुंठे रब को

रूंठे रब को मनाना आसान हे ,
भरे मन में भगवान् को बसाना मुश्किल हे !
तोड़ दे नाता जग से ,
जोड़ ले नाता प्रभु से !
फिर दिल में भगवान को बसाना आसान हे ,
सब कुच्छ भुलाना आसन हे ,
भगवान् की याद भुलाना मुश्किल हे !
कहे मदन गोपाल प्रभु के चरणों ,
थोड़ी सी जगह मिल जाए
मेरा बिगडा भाग खुल जाए !
२-१०-०४
{६२}
भरे मन में भगवान् को बसाना मुश्किल हे !
तोड़ दे नाता जग से ,
जोड़ ले नाता प्रभु से !
फिर दिल में भगवान को बसाना आसान हे ,
सब कुच्छ भुलाना आसन हे ,
भगवान् की याद भुलाना मुश्किल हे !
कहे मदन गोपाल प्रभु के चरणों ,
थोड़ी सी जगह मिल जाए
मेरा बिगडा भाग खुल जाए !
२-१०-०४
{६२}
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Saturday, March 29, 2008
मेरे पालनहार

औ मेरे पालनहार ,
तेरी मया हे अपरमपार !
इतने बनाये तू ने बन्दे ,
मगर शकल नही मिलती ,
शकल एक दुसरे से !
क्या बनाया हे बन्दा ,
चलता फिरता ,
करने वाला सब तरह
का धंदा !
झूट बोलता हे ,पाप करता हे ,
लेकर नही आया था कुछ भी ,
पर अब सब अपना ही समझता हे !
अगर बस चले तो,
ले जाए बाँध कर सब ,
इस तरह की न दीखे किसी को
उस की चोरी !
कहे मदन गोपाल खुश हो इसतरह
दे कर धोका संसार को !
१-९-०४
तेरी मया हे अपरमपार !
इतने बनाये तू ने बन्दे ,
मगर शकल नही मिलती ,
शकल एक दुसरे से !
क्या बनाया हे बन्दा ,
चलता फिरता ,
करने वाला सब तरह
का धंदा !
झूट बोलता हे ,पाप करता हे ,
लेकर नही आया था कुछ भी ,
पर अब सब अपना ही समझता हे !
अगर बस चले तो,
ले जाए बाँध कर सब ,
इस तरह की न दीखे किसी को
उस की चोरी !
कहे मदन गोपाल खुश हो इसतरह
दे कर धोका संसार को !
१-९-०४
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