भगवान् जब दुःख देता है तो ,
सहने की शक्ति भी देता है!
और फिर दुःख सहते सहते ,
जब शक्ति आती है !
तो प्रभु की कृपा समझ कर ,
उस में दुःख आने लगता है !
और फिर सुख आजाता है ,
तो दुःख चला जाता है !
यदि सुख आने के बाद ,
प्रभु की कृपा भूल गया !
तो फिर वही दुःख आजाता है ,
और आदमी सुख में भी ,
दुखी लगता है
कहे मदन गोपाल क्यों कि प्रभु की
कृपा हो गई खतम
२३-०३-०४
Thursday, November 29, 2007
Friday, November 16, 2007
मोत
मोत पर नहीं जोर किसी का ,
कैसे आयगी कहाँ से आयगी ,
कब आयगी किस को आयगी ,
सब देखते रह जायँगी ,मोत ले कर चली जायगी !
छोटा हो बच्चा हो या हो बूढ़ा,
मोत के आगे सब हें बराबर
वह अपने टाइम पर आयगी
कर देगी हिसाब बराबर ,
बन्दा सो जायगा
और सब रह जायँगी दंग ,
पिंजरा रह जायगा
और पंछी उड़ जायगा
कहे मदन गोपाल रोना धोना
चालू होजायगा
और पिंजरे को लगा दी जायगी आग !
कैसे आयगी कहाँ से आयगी ,
कब आयगी किस को आयगी ,
सब देखते रह जायँगी ,मोत ले कर चली जायगी !
छोटा हो बच्चा हो या हो बूढ़ा,
मोत के आगे सब हें बराबर
वह अपने टाइम पर आयगी
कर देगी हिसाब बराबर ,
बन्दा सो जायगा
और सब रह जायँगी दंग ,
पिंजरा रह जायगा
और पंछी उड़ जायगा
कहे मदन गोपाल रोना धोना
चालू होजायगा
और पिंजरे को लगा दी जायगी आग !
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Tuesday, November 13, 2007
चाह चाह
जहरीली चाह क्यों पीता है ,
भगवान् के नाम की चाह पी !
इस चाह को पीकर तू धन्य हो जायगा ,
अगर बनाना हे धन्य ,तो उस के नाम की चाह पी !
उस चाह में प्रेम की चीनी डाल,
चाह की पत्तियों की जगह ,
अपने अन्दर के अच्छे विचार डाल ,
दूध की जगह अपने अच्छे कर्म डाल
और पीजा उस चाह को
तेरे सब खोट बाहर आजायंगे
तेरे अन्दर का मेल साफ हो जायगा
भगवान् के ऊपर जो गर्दा जमा है
वह छ्ट जायगा
कहे मदन गोपाल
यह चाह तुझ को भगवान् के दर्शन करायगी !
१६-१२-२००६
भगवान् के नाम की चाह पी !
इस चाह को पीकर तू धन्य हो जायगा ,
अगर बनाना हे धन्य ,तो उस के नाम की चाह पी !
उस चाह में प्रेम की चीनी डाल,
चाह की पत्तियों की जगह ,
अपने अन्दर के अच्छे विचार डाल ,
दूध की जगह अपने अच्छे कर्म डाल
और पीजा उस चाह को
तेरे सब खोट बाहर आजायंगे
तेरे अन्दर का मेल साफ हो जायगा
भगवान् के ऊपर जो गर्दा जमा है
वह छ्ट जायगा
कहे मदन गोपाल
यह चाह तुझ को भगवान् के दर्शन करायगी !
१६-१२-२००६
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