Sunday, April 6, 2008

प्रभु जी तुम बिन कोन

प्रभु जी तुम बिन कोन हमार ,
तूं ही हम सब की पालनहार
प्रभु जी तुम ..........!
प्रभु जी किस पर जाकर लगाऊं
में गुहार ,
दान पुन्य कुच्छ किय नहीं ,
पापों का लगाया अम्बार ,
प्रभु जी तुम .........!
अखियाँ दरसन को तरस गई ,
आयेगी कब हमारी बार ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
भाव सागर से पार लगा दो ,
हमारी नय्या के खेवन हार ,
प्रभु जी तुम बिन ......!
प्रार्थना हे मदन गोपाल की ,
पापों को हमारे ध्यान न रखना ,
सिर चरणों में रख लेने देना ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
२१-२-08

Saturday, April 5, 2008

तुम्हारी पूजा करूँ

तुम्हारी पूजा करूँ प्रभूजी में फूलों से फूलों से ,
मन के फूलों से ,
मन की मणियाँ अर्पित कर दूँ
तुम्हारे चरणों में !फूल न सही
मन की मणियाँ पुरो दूँ ,
हारों में हारों में !
हर मणी हे मन की मेरे तन की ,
त्य्म्हारी सेवा में तुम्हारी सेवा में !
मन का फूल बने और हार बने तन का ,
जिनको अरपर्ण कर सुफल करूँ ,
में लक्ष अपने जीवन का १
ग्रहण करो प्रभु जी मेरी माला ,
शरण तुम्हारी में आया !
यह प्ररार्थाना हे मदन गोपाल की ,
जीवन सुफल करदो ,
दे कर अपने हाथों की छाया
१८-३-२००६

गूरुवर मोको

गूरुवर मोको अपनी शरण में लीजो ,
मेरे अवगुण क्षमा कर दीजो ,
गूरुवर मोको .............!
में बालक नादान अज्ञानी ,
न जानूँ पूजा पाठ की विधि ,
मेरी पूजा कबूल कर लीजो ,
गूरुवर मोको .............!
जो में आऊं द्वार तिहारे ,
मोको गले से लगालीजो ,
मेरे खोट सदा के लिय मिटा दीजो ,
गूरुवर मोको .............!
मुझे अपना सेवादार बना लीजो ,
में तुम्हारे चरणों का दास ,
मुझे वहीं रहने की आज्ञा दीजो,
गूरुवर मोको ..........
प्रार्थना हे यह मदन गोपाल की ,
मुझे अपने से कभी अलग मत कीजो ,
गूरुवर मोको ............!
२५-२-०६

Tuesday, April 1, 2008

शिव शिव बोल

शिव शिव बोल ,
यह बोल बड़े अनमोल !
बिना तोले ही बोल ,
तोलने में समय मत गवां ,
समय गवायेगा तो फिर पीछे पछ्ताय्गा !
समय बीता फिर वापिस नहीं आयगा !
शिव शिव बोल तेरा मन साफ हो जायगा ,
दिल से परदा हटा तो तेरा ह्रदय शुद्ध हो जायगा !
दिल शिव के लायक बन जायगा ,
शिव आयंगे तेरे दिल में निवास करेंगे ,
तेरे पाप का घडा फूट जायगा !
पाप पुंय में बदल जायेगे ,
शिव त्य्झे देंगे भक्ती और ,
सुबुद्धी दान !
कहे मदन गोपाल शिव की
माया हे अपरम्पार ,
कूइ नही पाया उसका पार
२१-१२-06

Monday, March 31, 2008

रुंठे रब को


रूंठे रब को मनाना आसान हे ,
भरे मन में भगवान् को बसाना मुश्किल हे !
तोड़ दे नाता जग से ,
जोड़ ले नाता प्रभु से !
फिर दिल में भगवान को बसाना आसान हे ,
सब कुच्छ भुलाना आसन हे ,
भगवान् की याद भुलाना मुश्किल हे !
कहे मदन गोपाल प्रभु के चरणों ,
थोड़ी सी जगह मिल जाए
मेरा बिगडा भाग खुल जाए !
२-१०-०४
{६२}

Saturday, March 29, 2008

मेरे पालनहार


औ मेरे पालनहार ,
तेरी मया हे अपरमपार !
इतने बनाये तू ने बन्दे ,
मगर शकल नही मिलती ,
शकल एक दुसरे से !
क्या बनाया हे बन्दा ,
चलता फिरता ,
करने वाला सब तरह
का धंदा !
झूट बोलता हे ,पाप करता हे ,
लेकर नही आया था कुछ भी ,
पर अब सब अपना ही समझता हे !
अगर बस चले तो,
ले जाए बाँध कर सब ,
इस तरह की न दीखे किसी को
उस की चोरी !
कहे मदन गोपाल खुश हो इसतरह
दे कर धोका संसार को !
१-९-०४

Friday, March 28, 2008

....रखो


सोता हे उठा कर रखो ,
रोता हे हंसा कर रखो ,
भूखा हे खिला कर रखो ,
रुन्ठा हे मना कर रखो ,
आया हे बिठा कर रखो ,
भगवान को दिल में बसा कर रखो ,
कहे मदन गोपाल ,
इश्वर के चरणों मी सिर झुका कर रखो !
३०-५-२००४

मूर्ख क्यों रोता हे


मूर्ख तू क्यों रोता हे ,
इश्वर जो भी करता हे अच्छा ही करता हे !
तू चाहे न चाहे होना हे जो वह होता हे ,
तू आज की देखता हे ,
भगवान् आगे की देखता हे !
तुम्हारे लिए क्या आच्छा हे ,
वह वही करता हे जो उसे अच्छा लगता हे !
तू मत सोच आगे क्या होगा
वह हे न तुझे संभालने को !
न सोच क्या ग़लत हुआ क्या सही हुआ ,
कहे मदन गोपाल जो हो गया
use सोच सोच कर क्यों दुखी होता हे !
३०-५-04

Wednesday, March 26, 2008

इतनी क्रपा कर दो


है भोले नाथ इतनी कृपा कर दो ,
मेरे ऊपर अपनी प्रेम की वर्षा कर दो !
प्रभू मेरा दिल अपने प्यार से भर दो ,
में प्यासा हूँ आपकी करुणा का ,
अपनी करुणा से मेरा दिल भर दो !
मुझ पर इतनी कृपा कर दो ,
मुझ को भिक्षा इतनी देदो ,
अपने चरणों में जगह दे दो,
और माँ बाप का प्यार दे दो !
में रोज लूँ नाम तुम्हारा ,
इतनी भक्ती का वरदान दे दो !
कहे मदन गोपाल में बच्चा हूँ तेरा ,
मेरे सब पाप क्षमा कर दो ,
प्रभु इतनी कृपा कर दो !
२७-३-०४

Sunday, March 23, 2008

जिंदगी का बोझ

जिंदगी का बोझ हंस कर उठाना चाहिय ,
राह की मुसीबतों पे मुसकराना चाहिए !
हंस हंस कर चलता जायगा ,
टू अंधेरे में भी रास्ता बन जायगा !
रो कर चलेगा बन्दे तो ,
रास्ता कठिन हो जायगा !
कहे मदन गोपाल न पहुंच पायगा मंजिल तक ,
बीच में ही थक कर बैठ जायेगा !
२३-०४-06