बच्चों को खेलते देखता हूँ ,
तो मेरा मन भी करता है में भी खेलू !
मगर में बच्चा बन नहीं सकता ,
बड़ा हो कर बच्चों जेसे खेल खेल नहीं सकता !
तो क्या बच्चों में बन जाऊ बच्चा ,
और मजा लूँ उस जिन्दगी का ,
जो छोड़ आया हों पीछे !
जब में भी ऐसे ही खेला करता था ,
सोचे मदन गोपाल और हारने पर रोने लगता था !
१४-८ ०४
Thursday, May 1, 2008
Saturday, April 26, 2008
मन
मन ने सब को बाँध रखा है ,
मन को बांधना आसान नहीं ,
मन ने देवताओं को परास्त कर डाला ,
वह इन्द्रियों को क्या समझता है ,
मन की मार बड़ी जबरदस्त है ,
मन के सामने कौन ठहर सकता है ,
मन ही मन का बोधक है ,
मन ही मन का साधक है ,
मन ही मन का बाधक है ,
और मन ही मन का घातक है !
मन सरपट भागने वाला घोडा है ,
मन को वैराग्य की लगाम से
उसकी चाल काबू में करके ,
उसे वश में करना होगा ,
jo ऐसे दुर्जन मन पर सवार होगा ,
वह बलवानो से भी बलवान होगा ,
मन की एक बात बड़ी अच्छी है ,
जिस चीज का चसका लगता है ,
उसी में वह लग जाता है ,
इस लिए इसे ,
आत्मनुभाव का ,
सूख बराबर देते रहना चाहिए !
मन को बांधना आसान नहीं ,
मन ने देवताओं को परास्त कर डाला ,
वह इन्द्रियों को क्या समझता है ,
मन की मार बड़ी जबरदस्त है ,
मन के सामने कौन ठहर सकता है ,
मन ही मन का बोधक है ,
मन ही मन का साधक है ,
मन ही मन का बाधक है ,
और मन ही मन का घातक है !
मन सरपट भागने वाला घोडा है ,
मन को वैराग्य की लगाम से
उसकी चाल काबू में करके ,
उसे वश में करना होगा ,
jo ऐसे दुर्जन मन पर सवार होगा ,
वह बलवानो से भी बलवान होगा ,
मन की एक बात बड़ी अच्छी है ,
जिस चीज का चसका लगता है ,
उसी में वह लग जाता है ,
इस लिए इसे ,
आत्मनुभाव का ,
सूख बराबर देते रहना चाहिए !
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मन
| प्रतिक्रियाएँ: |
Sunday, April 6, 2008
प्रभु जी तुम बिन कोन
प्रभु जी तुम बिन कोन हमार ,
तूं ही हम सब की पालनहार
प्रभु जी तुम ..........!
प्रभु जी किस पर जाकर लगाऊं
में गुहार ,
दान पुन्य कुच्छ किय नहीं ,
पापों का लगाया अम्बार ,
प्रभु जी तुम .........!
अखियाँ दरसन को तरस गई ,
आयेगी कब हमारी बार ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
भाव सागर से पार लगा दो ,
हमारी नय्या के खेवन हार ,
प्रभु जी तुम बिन ......!
प्रार्थना हे मदन गोपाल की ,
पापों को हमारे ध्यान न रखना ,
सिर चरणों में रख लेने देना ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
२१-२-08
तूं ही हम सब की पालनहार
प्रभु जी तुम ..........!
प्रभु जी किस पर जाकर लगाऊं
में गुहार ,
दान पुन्य कुच्छ किय नहीं ,
पापों का लगाया अम्बार ,
प्रभु जी तुम .........!
अखियाँ दरसन को तरस गई ,
आयेगी कब हमारी बार ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
भाव सागर से पार लगा दो ,
हमारी नय्या के खेवन हार ,
प्रभु जी तुम बिन ......!
प्रार्थना हे मदन गोपाल की ,
पापों को हमारे ध्यान न रखना ,
सिर चरणों में रख लेने देना ,
प्रभु जी तुम बिन ........!
२१-२-08
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