Friday, November 16, 2007

मोत

मोत पर नहीं जोर किसी का ,

कैसे आयगी कहाँ से आयगी ,

कब आयगी किस को आयगी ,

सब देखते रह जायँगी ,मोत ले कर चली जायगी !

छोटा हो बच्चा हो या हो बूढ़ा,

मोत के आगे सब हें बराबर
वह अपने टाइम पर आयगी
कर देगी हिसाब बराबर ,
बन्दा सो जायगा
और सब रह जायँगी दंग ,
पिंजरा रह जायगा
और पंछी उड़ जायगा
कहे मदन गोपाल रोना धोना
चालू होजायगा
और पिंजरे को लगा दी जायगी आग !

Tuesday, November 13, 2007

चाह चाह

जहरीली चाह क्यों पीता है ,
भगवान् के नाम की चाह पी !
इस चाह को पीकर तू धन्य हो जायगा ,
अगर बनाना हे धन्य ,तो उस के नाम की चाह पी !
उस चाह में प्रेम की चीनी डाल,
चाह की पत्तियों की जगह ,
अपने अन्दर के अच्छे विचार डाल ,
दूध की जगह अपने अच्छे कर्म डाल
और पीजा उस चाह को
तेरे सब खोट बाहर आजायंगे
तेरे अन्दर का मेल साफ हो जायगा

भगवान् के ऊपर जो गर्दा जमा है
वह छ्ट जायगा
कहे मदन गोपाल
यह चाह तुझ को भगवान् के दर्शन करायगी !

१६-१२-२००६


Thursday, November 1, 2007

प्रभु मेरे सब कुछ हो

है प्रभु तुम मेरे सखा हो ,
माता हो पिता हो ,
और नाथ हो ,
प्रभु मेरा कोई सहारा नहीं ,
तुम ही एक मेरा सहारा हो ,
मेरे रखवाले हो ,
है प्रभु अगर में आपको ,
भूल भी जाऊं तो ,
कर्पा करना एसी ,
मुझे न भुलाना कभी ,
हे प्रभु मेरे मन मन्दिर में आओ ,
और उस में उजाला कर दो ,
हे प्रभु तुम मुझे प्राणों से भी ज्यादा प्यारे हो ,
कहे मदन गोपाल हे प्रभु तुम को
मेरा बारं बार प्रणाम
२०-३-२००६

शक्ति दो

हे प्रभु मुझे शक्ति दो ,
हे प्रभु मुझे भक्ति दो !
हे प्रभु मुझे प्रेम दो !
मुझे कुच्छ और नहीं चाहिए ,
अपने चरणों में जगह दो !
दिन रात लूँ तुम्हारा नाम ,
दिन हो या रात अंधियारा ,
गर्मी हो या सर्दी ,
रहूँगा जैसे तेरी मर्जी !
न कभी शिक़ायत करूंगा ,
न अपना दुखडा रोउंगा !
हाँ अगर तुने अपने से अलग किया ,
तो बिलख बिलख कर रोउंगा !
कहे मदन गोपाल तेरे चरणों से
अपना सिर नहीं हटाउंगा !

२३-३-2004

Sunday, October 28, 2007

दया करना

मेरे प्रभू जी मुझ पर दया करना ,
मेरी छोटी सी मांग है उस को पूरा करना !
न मंगू में रोटी कपडा ,
न मांगू धन दोलत !
मुझ को सिखा दो सब्र करना !
न मांगू में हीरा मोती ,
न मंगू रुमाल धोती ,
मुझ को क्रोध जब आए ,
उस से बचा लेना !
कहे मदन गोपाल मुझे अंहकार न आए
न हो जलन किसी से
बस इतनी कृपा करना !!
१५-५-२००४

भगवान की महिमा

ए मेरी आंखों को रोशनी देने वाले ,
कानो को ध्वनी देने वाले !

में तेरा उपकार कैसे करूं ,
रात को सोने के बाद मरने के बराबर ,
सुबह को नई जिन्दगी देने वाले ,
मेरे हाथों को अच्छा काम करने की ताकत देने वाले ,

और पैरों को अच्छे रास्ते पर चलाने वाले
में तेरा धन्यवाद कैसे करूं !
मेरे बदन को सूरज की गर्मी
और चाँद की ठण्डक देने वाले
फूलों से खुशबू और पेडों से फल देने वाले ,
कहे मदन गोपाल मेरी जिन्दगी को जीवन देने वाले
तेरा आभार में कैसे करूं !
१५ -३ -२००४