Sunday, March 16, 2008

मन के पट P

मन के पट खोल रे तोहे पिया मिलेंगे ,
जीवन यों न बिता रे तोहे प्रभु मिलेंगे !
अन्दर बाहर लगा दे झाडू कर इस मन मन्दिर को साफ रे ,
दीया जला धूप बत्ती जला कर डाल इसको रोशन
और अन्धकार को दूर रे !
चंदन की खटिया बना और फूलों की सेज रे ,
कूडा करकट फ़ेंक बाहर रे !
कहे मदन गोपाल तू याद कर उस प्रभू को बन्दे ,
ताकि आकर रह सके वो यहाँ रे !
२४-३-04

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